सावधान : फोनेमे ऐप इन्स्टाल करने से पहले ये बाते जान लीजिए वर्ना पड़ेगा भारी

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Mobile Apps

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मोबाइल एेप्स को लेकर चौंकाने वाली खबर आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 10 से 7 ऐप अपने यूजर की निजी जानकारी थर्ड पार्टी सर्वर को दे देते हैं। इसे यूजर्स की निजता का हनन बताया जा रहा है।

जो जानकारी शेयर की जा रही है, वो है, आप कहां रहते हैं, कहां काम करते हैं, परिवार में कौन-कौन है, दोस्त कैसे हैं, दूसरों के साथ आप कैसे बात करते हैं, आपकी आदतें कैसी-कैसी हैं? एक तरह से इस जानकारी के आधार पर कोई भी आपका बड़ी आसानी से आपका डिजिटल प्रोफाइल बना सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 70 फीसदी मोबाइल ऐप, यूजर्स का यह पर्सनल डेटा थर्ड पार्टी ट्रैकिंग कंपनियों जैसे- गूगल एनेलिटिक्स, फेसबुक ग्राफ एपीआई या क्रेशलिटिक्स के साथ साझा कर रहे हैं।

परमिशन देते ही हो जाता है खेल :

आजकल जो नए ऐप्स आ रहे हैं, वो पर्सलन इन्फॉर्मेशन एक्सेस करने से पहले यूजर की परमिशन मांगते हैं। वहीं कुछ अन्य ऐप्स ऐसे हैं जो इस अनुमति के बगैर पूरी तरह काम नहीं करते हैं। जैसे ही यूजर पर्सनल इन्फॉर्मेशन की एक्सेस देता है, उसकी सारी जानकारी हासिल कर ली जाती है और सौदा कर दिया जाता है। आशंका जताई गई है कि ये ऐप्स यूजर की निजी जानकारी को सायबर अपराधियों के हाथों में बेच सकते हैं।

थर्ड पार्टी लायब्रेरी बनी बड़ा खतरा :

ऐप डेवलपर यूजर एंगेजमेंट में मदद के लिए कुछ अन्य डेवलपर्स या कंपनियों की मदद लेते हैं, जिन्हें थर्ड पार्टी लायब्रेरी कहा जाता है। यह व्यवस्था सबसे बड़ा खतरा बन रही है। मसलन- किसी ऐप को आप अपनी लोकेशन जानने का अधिकार देते हैं तो दूसरे ऐप को अपने मोबाइल में दर्ज कॉन्टेक्ट्स का एक्सेस देते हैं, लेकिन हो सकता है कि दोनों ही ऐप बनाने वालों की थर्ड पार्टी लायब्रेरी एक ही हो। यूजर को पता ही नहीं चलेगा कि उसकी जानकारी कहां-कहां चली गई और कौन कैस इनका दुरुपयोग कर सकता है।