कहानी कमनसीब कार की, पढ़े जिसने खरीदी उसका क्या हुआ

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AUSTRIA CAR

वो कमनसीब कार

दुनिया में कुछ चीजे ऐसी होती है की जो शापित होती है और इसके खरीदनेसे  आपको कुछ न कुछ नुकशान होता ही है | यहाँ पे हम एक ऐसी ही कार के बारेमें बात करेंगे जिसे आप पढेगे तो हेरात में पड जायेंगे.

प्रस्तुत : ये एक दुभाग्यपूर्ण सत्य घटना है, ओस्ट्रिया हंगेरि के राज कुमार के बारेमे है, १९१४ में २५ जून के रोज जब वो अपनी रानी सोफ़िया के साथ एक कार में सफ़र कर रहे थे तब कुछ अनजान लोगोने उन पर हमला कर दोनोकी हत्याकी और वो हत्याए इतनि कमनसीब थी की इसको २०१४ के पहले विश्वयुद्ध की  शरुआती निशानी माना जाता है |

बादमे वो कार ऑस्ट्रियन सेनाके जनरल पिटीओरेके ने खरीदी और उन्हें विश्वयुद्ध में  हारका सामना करना पड़ा. उस दोरान वो कार लेकर बहार निकले तो उनकी कार से किसी राह्दारिकी मृत्यु हो गई. इसी बात को लेकर वो मानसिक तनाव में आ गये और वो पागल हो गए |

फिर यूगोस्लाविया के गवर्नर ने ये गाड़ी खूब उत्साह् से खरीदी ये कार जब तक उनके पास रही तब तक ये कार की छोटी मोटी टकराव होती रही मगर एक बड़े अकस्मात् में उनकी हाथ कट गई, उनको ये कार शापित है ऐसा अहसास हो गया और ये कार एक डॉक्टर को बेच दी मगर एक छोटे अक्सिडेटमें उस डॉक्टर की मोत हो गई | ये कार का नसीब इतना अच्छा था की वो हाथो हाथ बिक जाती थी, जिसको मोत पुकारतीथी वो ये कार खरीदता था अब ये कार एक ज्वेलर के पास गई इस कार के आतेही उसके धंधे में नुकशानी आने लगी वो पायमाल हो गया और आत्महत्या करली |

इस के बाद इस कारक अगला शिकार एक कृषि था वो इस कार दुर्गटना में मर गया और साथ साथ लोगो को इस कार की कमनशिबी  का भी पता चलने लगा मगर ये कार इतनी सुन्दर थी की लोग इस कार को खरीदने केलिए बेताब थे मगर इस वाकये से लोग अब डरने लगे थे मगर एक गराज वाले ने साहस किया और इस कार को ख़रीदा, वो कार का जानकार था वो अपने दोस्तों के साथ सफ़र का मजा लेने लगा मगर समय रहते इस कारने उसेभी दागा दिया एक दिन स्टीयरिंग पर से काबू गवाने से ये कार एक पेड़ से टकराई और एक खाई में गिरी, बैठे हुए सबलोग मारे गए |

इस घटनाओ से ऑस्ट्रियन सरकार भी चोक गई और ये कार सरकार ने ही खरीद ली और कलर करवाके ये A III 118  नम्बर वाली कार अभी वियेना के एक म्युजियम की शोभा बढ़ा रही है ये भी देखे की १९१८ में ये कार म्यूजियम में  रखी तब ११ नवम्बर १९१८ में विश्वयुद्ध ख़तम हुआ |

  •  कहानी लेखक : जयेश रावल – नवगुजरात